Thursday, 26 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

'मानस' के प्रति लोगों में जो प्रेम और आकर्षण है, मैं उसका अनुभव सदैव ही करता रहा हूँ । बरेली में कार्यक्रम कई महिने पहले से निर्धारित था । बाद में जब लोकसभा के चुनाव की तिथियाँ घोषित हुई तो कुछ ऐसा संयोग उपस्थित हो गया कि उस प्रसंग के समापन के दिन ही बरेली में मतदान की तिथि घोषित कर दी गई । आयोजकों को चिन्ता हुई कि तब तो उस दिन बहुत कम संख्या में लोग आ सकेंगे ! ऐसा सोचकर समापन की तिथि एक दिन आगे-पीछे रखने की बात उठी, तो मैंने उनसे कहा कि पूर्व निर्धारित दिन ही समापन रखा जाना चाहिए । क्योंकि वह बड़े महत्व का दिन है । लोग मतदान तो करेंगे ही, पर मैं देखना चाहता हूँ कि भगवान राम के पक्ष में कितना मतदान होता है । और सचमुच ! उस दिन बड़ा विलक्षण अनुभव हुआ ! उस दिन अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक संख्या में लोग एकत्रित हुए और विशेष बात यह कि दिन में उन लोगों ने भिन्न-भिन्न उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया होगा पर भगवान राम के पक्ष में वे सब एकमत थे । अतः भगवान राम के पक्ष में जो मतदान है, वह तो सार्वजनीन है और यह तो बड़े आनन्द की बात है । क्यों न हो ! भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व ही ऐसा है ।

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