Tuesday, 17 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

भगवत्कथा में ऐसा दिव्य आनन्द प्राप्त होता है, ऐसी दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है कि व्यक्ति उसमें निरन्तर निमग्न रहना चाहता है । क्योंकि कथा का अर्थ मात्र इतिहास या घटनाओं का वर्णन ही नहीं है । सन्तों ने, भक्तों ने किन-किन दृष्टियों से भगवान को देखा, उनके लीला-चरित्र को किस रूप में किसने ह्रदयंगम किया, कैसे हम उस दिव्य आनन्द को पा सकते हैं ? यह सब हम कथा के द्वारा ही प्राप्त करते हैं । कथा का हमारे जीवन में गहरा प्रभाव पड़ सकता है और इसके माध्यम से हमें ईश्वर के प्रत्यक्ष दर्शन से भी अधिक लाभ और आनन्द की प्राप्ति हो सकती है । पर इसे किस प्रकार सुनें, यह बहुत महत्वपूर्ण है । इसे केवल मनोरंजन की दृष्टि से नहीं, सही अर्थों में ग्रहण करना यदि व्यक्ति सीख ले तो जीवन में परिवर्तन हुए बिना नहीं रहेगा ।

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