Wednesday, 4 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

गोस्वामीजी बताते हैं कि गुणों या पुण्यों के आने पर व्यक्ति के जीवन में अभिमान, ईर्ष्या, द्वेष आदि अवगुण उसके सारे सद्गुणों को खा जाते हैं । अतः व्यक्ति को चाहिए कि वह सजग भाव से अपने आपको देखता रहे । अपने आपको नित्य कसता रहे, अपनी समीक्षा करता रहे । अपने अवगुणों को पहिचाने और प्रभु के चरणों में उनसे मुक्ति हेतु निवेदन करे । इसीलिए आप गोस्वामीजी के पदों में यह बात पायेंगे कि उनका प्रारंभ निराशा से होता है पर अन्त प्रभु के प्रति चरम विश्वास से होता है । और यह मानो प्रभु की कृपा का ही फल है ।

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