Thursday, 11 January 2018

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

सुग्रीव के चरित्र में साधना की दृष्टि से एक क्रमिक विकास है । इसके बाद भी उसके चरित्र में समस्याएँ आती हैं । बालि का वध करने के बाद भगवान ने सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य दे दिया, पर राज्य देते समय उन्होंने सुग्रीव को सावधान कर दिया ।बोले, एक बात याद रखना, सीताजी का पता भी लगाना है, इस बात को मत भूलना और भगवान ने ये सुग्रीव से ही नहीं हम सब लोगों से भी कहा है कि राज-काज, स्त्री, परिवार तो सब मिल गया, पर यह मत भूलना कि लक्ष्य जो है वह ये सब नहीं है, लक्ष्य है भक्तिरूपा सीताजी का पता लगाना । लेकिन राज्य पाकर सुग्रीव एक बार फिर भूल गये । तब हनुमानजी और लक्ष्मणजी द्वारा भय दिखाकर उन्हें लौटाना पड़ा । इस तरह सुग्रीव के जीवन में मिठाई और कड़वी दवाई, दोनों का प्रयोग किया गया ।

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