Thursday, 18 January 2018

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....

प्रभु जब सुवैल शैल पर विश्राम करने लगे, तो दो लोगों को अपने सिरहाने बैठाया और दो को चरणों में । सुग्रीव की गोद में प्रभु का सिर है, विभीषण कान के पास बैठे हैं, प्रभु का एक चरण अंगद की गोद में है और दूसरा हनुमानजी की गोद में । किसी ने पूछा, प्रभो ! यह जो बैठने का क्रम है, इसमें भी तो कोई उद्देश्य होगा ? भगवान बोले, मैंने पदों का बँटवारा कर दिया है । कैसे ? बोले, एक जो लंका का राजपद था, वह विभीषण को दे दिया । दूसरा जो किष्किन्धा का राज्य था, वह सुग्रीव को दे दिया, पर ये अंगद और हनुमान तो मेरा ही पद चाहते हैं, अतः इन्हें अपना ही पद दे दिया है, क्योंकि उन्हें अन्य किसी पद की अभिलाषा नहीं है ।

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