Wednesday, 3 January 2018

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

साधना का क्रमिक विकास और सीधा छलाँग, ये दोनों क्रम बालि और सुग्रीव के चरित्र में दिखाई देते हैं । सुग्रीव-चरित में साधना का क्रम विकास दिखाई देगा और बालि-चरित में छलांग दिखाई देगी । सुग्रीव के चरित्र में जो साधना का क्रम है, वह आपके सामने प्रत्यक्ष है । सुग्रीव सीधे भगवान के प्रेमी नहीं बन गए, क्रम से बने । उसके जीवन में भगवान को देखकर एक संशय है, जिज्ञासा है कि ये कौन हैं ? उन्हें हनुमानजी जैसे सन्त का आश्रय प्राप्त है । वे हनुमानजी से पूछते हैं, आप बताइए कि ये कौन हैं ? हनुमानजी जैसे सन्त के द्वारा उन्हें भगवान के निकट ला देना, यही साधना का क्रम है । जीव के ह्रदय में ईश्वर के प्रति संशय है, जिज्ञासा है । उस संशय और जिज्ञासा के समाधान के लिए किसी सन्त का आश्रय लेना चाहिए । हनुमानजी सन्त हैं । सन्त की विशेषता यह है कि वे भगवान को हमारे जीवन के निकट ला देते हैं ।

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