Saturday, 13 January 2018

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनके जीवन में बिना भय के प्रीति नहीं होती है । ऐसे लोगों के जीवन में प्रेम लाने के लिए भय का उपयोग करना चाहिए । भय करना बुरा है, भय नहीं करना चाहिए, ऐसा कहकर भय से छुटकारा नहीं पाया जा सकता । जिनकी प्रकृति ही ऐसी बनी हुई है, उनके लिए भय से मुक्ति का कोई उपाय नहीं है, पर इसका भी सदुपयोग है । सुग्रीव के चरित्र में भय का यह रूप भी दिखाई देता है ।

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