यदि दैत्य अमर हो जाए, तो क्या इससे उसका कल्याण होगा ? रामायण में तो रावण के बारे में आपको यही सूत्र मिलेगा । विभीषण ने आकर भगवान राम को सूचना दी कि महाराज ! रावण एक यज्ञ कर रहा है । भगवान बोले यह तो बड़ी शुभ सूचना है । यज्ञ को ध्वंस करनेवाला यज्ञ कर रहा है । विभीषण ने कहा - पर महाराज ! इस यज्ञ का फल यह होगा कि रावण अमर हो जाएगा । अब यह अमर हो जाना अच्छी बात है या बुरी ? भगवान राम ने पूछा कि तुम्हें क्या लगता है ? तो विभीषण द्वारा रावण के लिए एक शब्द प्रयोग किया गया, कहा कि इस यज्ञ के सिद्ध हो जाने पर वह अभागा मरेगा नहीं । यदि वह अमर हो जाता है तब तो उसे भाग्यशाली कहना चाहिए, पर वे कहते हैं कि महाराज, वह अभागा नहीं मरेगा । इसका अर्थ क्या हुआ कि अमर होकर वह सबको मारेगा । एक व्यक्ति यदि अमर होकर लाखों को कष्ट दे, उन्हें मारे, तो इस अमरता में किसका कल्याण है ? किसी का नहीं । उसमें संकेत यह था कि रावण के मरने में उसके स्वयं का भी कल्याण है और समाज का भी । क्यों ? इसलिए कि रावण मरेगा, तो मैं जानता हूँ आप उसे मुक्ति अवश्य देंगे । कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी अमरता समाज केे लिए और स्वयं उनके लिए बड़ी दुखदायी होती है । उनकी मृत्यु स्वयं उनके और समाज के लिए भी कल्याणकारी है ।
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