Sunday, 2 August 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्..............

एक व्यक्ति और है, जो चाहता है कि शंकरजी का विवाह पार्वतीजी से हो जाय। वह है काम, पर भगवान शंकर दोनों के प्रति अलग-अलग व्यवहार करते हैं। वे भगवान राम की तो स्तुति करते हैं, उन्हें नमन करते हैं और उनकी आज्ञा का पालन करने का वचन देते हैं और जब काम वही चेष्टा करता है, तो उसे जलाकर नष्ट कर देते हैं। ऐसा क्यों? मूलतः काम की निन्दा की जाती है। क्यों? एक दृष्टांत लें - जैसे, आप किसी व्यक्ति को दूध पिलायें और सोचें कि इससे उसकी शक्ति बढ़ेगी और वह स्वस्थ रहकर अधिक सेवा-कार्य कर सकेगा। फिर एक प्रक्रिया यह भी है कि किसी व्यक्ति से काम लेने के लिए उसे शराब पिला दें और उसमें जोश पैदा कर उससे काम लें। अब दूध की प्रक्रिया और शराब की प्रक्रिया में अन्तर है। दूध के द्वारा शरीर में जो स्फूर्ति आती है, स्वथ्यता आती है, वह क्रमिक रूप से आती है, पर जब व्यक्ति शराब पीता है, तो उसमें स्वथ्यता नहीं आती, लेकिन तत्काल उसे क्षणिक जोश का अनुभव होता है तथा वह अपने को स्वथ्य और सबल समझने लगता है।

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