जीवन में किसी दिशा में प्रवृत्त होने की क्षमता दो प्रकार से प्राप्त होती है - राम से और काम से। संसार में आप ऐसे व्यक्ति देखेंगे, जो भक्त हैं, ईश्वरीय प्रेरणा से कार्य करते हैं, बड़े सक्रिय हैं तथा ऐसे लोग भी दिखाई देंगे, जिनके जीवन में ईश्वर से कोई सम्बन्ध नहीं, ईश्वर की कोई प्रेरणा नहीं, फिर भी वे व्यवहार में सक्रिय दिखाई देते हैं। इन दोनो में पार्थक्य क्या है? एक दूध पीकर स्वथ्यता प्राप्त करता है, तो दूसरा शराब पीकर एक झूठी स्फूर्ति। भगवान राम और काम दोनों चाहते हैं कि भगवान शंकर पार्वतीजी से विवाह करें, पर दोनों की भावनाओं में मौलिक अन्तर है।
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