Friday, 7 August 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्...............

रावण ने एक पुत्र का नाम अक्षय एवं एक का मेघनाद रखा था। अक्षय कुमार लोभ का प्रतीक है और मेघनाद काम का। ये दोनों भाई हैं। रावण ने नाम भी बढ़िया चुना है। अक्षय वह जिसका कभी क्षय न हो। गोस्वामीजी ने कहा है - काम वात कफ लोभ अपारा। यह जो कफ है, वह अपार लोभ है। इसका तात्पर्य क्या है ? गोस्वामीजी ने यह अपार शब्द काम के साथ नहीं जोड़ा, क्रोध के साथ भी नहीं जोड़ा, पर लोभ के साथ जोड़ दिया। यही गोस्वामीजी की विलक्षण सावधानी है, क्योंकि न तो काम अपार हो सकता है और न क्रोध ही। कितना भी कामी क्यों न हो, पर वह सदा काम में नहीं रह सकता, कोई कितना भी बड़ा क्रोधी क्यों न हो, पर वह चौबीसों घंटे क्रोध में नहीं रह सकता, पर लोभ ऐसा है, जो जीवनभर चौबीसों घंटे अक्षय और अपार है।

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