भगवान राम लक्ष्मण से विस्तार से बसन्त ऋतु का वर्णन करते हैं। चारों ओर बसन्त छायी हुई है। बसन्त ऋतु में किसी वाटिका में चले जाइए, पुष्प खिले रहते हैं, नये-नये पत्ते आये रहते हैं, सब कुछ कितना सुहावना लगता है। पर भगवान राम कहते हैं - चतुर व्यक्ति वह है जो इससे सावधान रहता है, जो समझ लेता है कि यह काम के आक्रमण की पूर्वपीठिका है। वे काम की चतुरंगिणी सेना का वर्णन करते हुए कहते हैं - पर्वतों की शिलाएँ काम के रथ हैं, जो झरने झर रहे हैं वे काम के नगाड़े हैं, पपीहे भाट हैं जो विरदावली का वर्णन करते हैं, भौंरों की गुंजार भेरी और शहनाई हैं, शीतल, मंद और सुगंधित हवा मानो दूत का कार्य लेकर आयी है। ये जो वृक्ष हैं, काम के सैनिक हैं। इस प्रकार बसन्त का चित्र प्रस्तुत करते हुए वे आगे कहते हैं - लक्ष्मण ! काम की इस सेना को देखकर जो धीर बने रहते हैं, जगत में उन्हीं की वीरों में प्रतिष्ठा होती है।
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