Thursday, 6 August 2015

युग तुलसी श्रीरामकिंकर उवाच्..............

जब हनुमानजी सुग्रीव से मिलाने भगवान राम और लक्ष्मण को अपनी पीठ पर चढ़ा लेते हैं। प्रभु ने हनुमानजी से विनोद किया - जब दशरथजी ने मुझे गोद में उठाया था, तो तुम भी मुझे गोद में लेकर पर्वत पर चलते। पीठ पर बिठाने की क्या आवश्यकता है ? हनुमानजी ने कहा, नहीं महाराज! गोद में लेने और पीठ पर बिठाने में बड़ा अन्तर है। क्या अन्तर है ? जिसे गोद में लिया जाता है, गोद में लेने वाला उसी को पकड़े रहता है, पर जब कोई पीठ पर बैठता है, तो वही बैठाने वाले को पकड़े रहता है। दशरथजी समर्थ थे। वे आपको पकड़े रह सकते थे, पर मैं चाहता हूँ कि आप ही मुझे पकड़े रहिए। समर्थ जीव भले ही आपको धारण करे, पर मुझ जैसे व्यक्ति को आप पकड़े रहें इसी में उसका कल्याण है।

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