Tuesday, 4 August 2015

युग तुलसी तुलसी श्रीरामकिंकर उवाच्..................

यदि आप बुराइयों लड़ सकते हैं, तो अवश्य लड़ें और उन्हें हरायें, पर बालि की तरह नहीं। बालि भी बुराइयों को हराता है, पर वह उन्हें खत्म नहीं करता, बल्कि बचा लेता है। जैसे, उसने रावण को हरा तो दिया, पर उसे मारा नहीं अपितु अपनी बगल में छः महीने तक दबाये रखा। इसका तात्पर्य आप समझ ही गये होंगे। छः महीने तक रावण के खाने-पीने की चिन्ता भी बालि को करनी पड़ी होगी कि रावण कहीं मरने न पाये। मतलब यह कि पुण्य ने पाप को हराने के बाद भी पाप को जीवित बनाये रखने की चिन्ता की और उस चिन्ता के पीछे मनोभाव यह था कि बालि को डर सताता था कि यदि मैं किसी को बताऊंगा कि मैंने रावण को हरा दिया है तो लोग शायद सन्देह करें, मेरी बात का विश्वास न करें, इसलिए वह रावण को बगल में दबाये घुमता रहा। यह प्रदर्शन प्रिय पुण्य है, यह मानो अपने पुण्य के दिखावे के लिए पाप को जीवित रखना है।

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